महापौर प्रत्याशी पूनम सिंह का जनसंपर्क अभियान अब और अधिक तेज़ और व्यापक हो गया है।
समर्थकों और सहयोगियों के उत्साह एवं जोश के साथ लगातार विभिन्न वार्डों में तूफानी दौरा जारी है। चैनपुर क्षेत्र में बहेरवा, दर्जी मोहल्ला, सोनार मोहल्ला, पूरब मोहल्ला, कमलापुरी सहित कई क्षेत्रों में सैकड़ों लोगों ने उनका स्वागत किया और अपनी समस्याएँ खुलकर सामने रखीं।
जनता और व्यवसायियों ने पूर्व कार्यकाल में उत्पन्न भय, दबाव और कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। पूनम सिंह ने स्पष्ट कहा कि चुनाव के बाद जनसमर्थन के बल पर हर समस्या का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यवसायी समाज की रीढ़ हैं—जो अपनी पूंजी और समय लगाकर शहर को आगे बढ़ाते हैं—उन्हें डराने या तोड़ने की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने विकास कार्यों पर भी सवाल उठाए। शिवाजी मैदान, तालाब, नदी किनारे “मरीन ड्राइव” जैसे परियोजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी सवाल खड़े करती है।
इसी संदर्भ में गांधी मैदान का मुद्दा भी सामने आया। शहर के बीच बच्चों के खेलने के लिए मैदान का निर्माण निश्चित रूप से सराहनीय कदम है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वह आम जनता के लिए है या महापौर परिवार या उनके कुछ खास लोगों के व्यवसाय के लिए? आरोप है कि मैदान में लगे उपकरण—भूत बंगला, रेलगाड़ी, कैंटीन आदि—कथित रूप से रिश्तेदारों और करीबी लोगों को दे दिए गए, जो इसे निजी व्यवसाय की तरह चला रहे हैं। यदि यह सत्य है तो पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
पूनम सिंह ने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले आत्ममंथन आवश्यक है। चुनाव मुद्दों पर होना चाहिए—समान विकास, पारदर्शिता और 35ों वार्डों के संतुलित उत्थान पर। बाहरी चेहरों या फिल्म स्टारों के आने से शहर का विकास नहीं होता; बल्कि यहां का करोड़ों रुपए लेकर प्रचार के नाम पर मुंबई चले जाएंगे डालटेनगंज मेदिनीनगर को कुछ देने नहीं आ रहे हैं यह सब भीड़ दिखने एवं दिग्भ्रमित करने का एक नया हथकंडा है जिसे जनता सब समझ रही है और खुश इसलिए है कि कमाया हुआ कुछ पैसा लोगों के बीच में किसी बहाने निकल सके! बिकास ईमानदार नीयत और जवाबदेही से होता है। जनता अब जागरूक है और अपने हित में निर्णय लेने को तैयार है।