पलामू- कोयल नदी में स्नान कर , दही-चूड़ा प्रसाद के साथ संत मरियम स्कूल में मकर संक्रांति उत्सव मनाया गया

परंपरा और विज्ञान का संतुलन बनाकर जीवन में आगे बढ़ें छात्र: चेयरमैन

संत मरियम आवासीय विद्यालय में मकर संक्रांति का पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में निवासरत छात्रों ने परंपरा के अनुरूप प्रातः कोयल नदी में स्नान किया। स्नान के उपरांत विद्यालय में विशेष आयोजन कर पर्व की महत्ता को आत्मसात किया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव ने अपने हाथों से सभी विद्यार्थियों को दही-चूड़ा, गुड़ एवं तिलकुट का प्रसाद खिलाया। 

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मकर संक्रांति आत्मशुद्धि, अनुशासन और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का पर्व है। यह पर्व हमें परिश्रम, संयम और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। 

विद्यार्थियों को चाहिए कि वे सूर्य की तरह निरंतर प्रकाश फैलाते हुए ज्ञान, संस्कार और सफलता की दिशा में अग्रसर रहें। 
चेयरमैन ने मकर संक्रांति के सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ उसके वैज्ञानिक पक्ष पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जब सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक अनुकूल और ऊर्जावान होती हैं। इस समय दिन बड़े होने लगते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि इस पर्व पर तिल, गुड़, दही और चूड़ा का सेवन वैज्ञानिक रूप से भी उपयोगी है, क्योंकि ये खाद्य पदार्थ सर्दी के मौसम में शरीर को ऊर्जा, ऊष्मा और पोषण प्रदान करते हैं। नदी स्नान को भी उन्होंने स्वास्थ्य से जोड़ते हुए कहा कि स्वच्छ जल में स्नान शरीर और मन दोनों को ताजगी देता है। 
इन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भारतीय पर्व हमें आस्था के साथ वैज्ञानिक सोच विकसित करने की सीख देते हैं। छात्रों को चाहिए कि वे परंपरा, विज्ञान और शिक्षा—तीनों का संतुलन बनाकर जीवन में आगे बढ़ें।

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