मेदिनीनगर: गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी द्वारा झारखंड सरकार पर लगाया गया आरोप निराधार हैं।
भाजपा सरकार के पाप को झारखंड के लोकप्रिय हेमंत सोरेन सरकार पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। झारखंड में ट्रेजरी घोटाला रघुवर दास के समय का घोटाला है जिसे वर्तमान सरकार ने पकड़ा और लोगों के बीच लाने का काम किया है।अपनी सरकार पर आरोप लगता हुआ देखकर सत्येन्द्र नाथ तिवारी तिलमिला गए हैं और अनाप-शनाप बोल रहे हैं। उक्त बातें बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय समिति सदस्य सह पलामू जिला के प्रवक्ता चन्दन प्रकाश सिन्हा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा। प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए चन्दन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि गढ़वा विधायक पूरे झारखंड में 100 करोड़ ट्रेजरी घोटाला की बात कर रहें हैं लेकिन अकेले उनके नेता भानु प्रताप शाही 130 करोड रुपए के घोटाला करके भाजपा के शरण में बैठे हुए हैं और किसी बीजेपी के नेता का जुबान नहीं खुल रहा है। भानु प्रताप शाही के इस कृत्य से झारखंड राज्य का स्वास्थ्य व्यवस्था आज तक खड़ा नहीं हो पाया है। झारखंड राज्य के सबसे बड़ा घोटाला 4000 का घोटालेबाज मधुकोड़ा आज भाजपा के साथ हैं।यही नहीं पूरे भारत भर में जितने भी घोटालेबाज हैं वे सभी कार्रवाई के डर से भाजपा में शामिल होकर न्याय व्यवस्था को अंगूठा दिखा रहे हैं। उन पर सत्येन्द्र नाथ तिवारी का बयान क्यों नहीं आता है। उन्हें झारखंड के अलकतरा घोटाले पर भी चर्चा करना चाहिए था। खुद घोटाले में गर्दन तक डूबा हुआ व्यक्ति दूसरे के ऊपर उंगली उठाए यह समझ से परे है। झारखंड में ओबीसी को छात्रवृत्ति का पैसा नहीं मिलने का मुख्य कारण केंद्र सरकार से मिलने वाला अंशदान है। राज्य सरकार खुद का हिस्सा वितरित कर चुकी है और केंद्र से पैसा नहीं मिलने के कारण उन्हें छात्रवृत्ति का पैसा नहीं मिल पाया था। यदि उन्हें ओबीसी छात्रों की इतनी ही चिंता थी तो केन्द्र की सरकार से क्यों नहीं मांग कर पाए। सच्चाई बोलने से क्यों डर रहे हैं।नियमावली में संशोधन करते हुए ओबीसी छात्रों के लिए भी फंड आवंटित कर दिया गया है ।एक सप्ताह के अंदर झारखंड सरकार के फंड से सभी के खाते में पैसा चला जाएगा। सत्येंद्र नाथ तिवारी 2016 नियमावली के आधार पर शिक्षकों की बहाली की बात कर रहे हैं दरअसल वे चाहते हैं कि रघुवर दास की तरह ही झारखंड में भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश बिहार एवं अन्य राज्यों के छात्र आकर झारखंड में नौकरी करें और झारखंड के आदिवासियों एवं मूलवासियों से उनका हक अधिकार छीना जा सके। अबुआ सरकार झारखंड के आदिवासियों एवं मूलवासियों को प्राथमिकता देकर उन्हें आगे बढ़ाने की मंशा से कम कर रही है और वह किसी से डरने वाली नहीं है। महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करते हुए चन्दन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि वास्तव में केंद्र सरकार के मनसा महिला आरक्षण बिल के माध्यम से राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की थी। महिला आरक्षण बिल कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि ये एक जिम्मेदारी है।जिसे इमानदारी स्पष्ट आंकड़ों और साफ नियत के साथ लागू किया जाना चाहिए। महिला आरक्षण से जुड़ा 131 वां संविधान संशोधन बिल 2023 में ही पारित किया जा चुका है। जिसमें साफ कहा गया था की जनगणना और परिसीमन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। इस परिस्थिति में इसे दोबारा लाना सत्ता पक्ष के नियत को स्पष्ट करता है।राम-रहीम आसाराम और बिलकिस बानो के हत्यारोंं के जेल से छूटने पर खुशियां मनाने वाले लोगों को महिलाओं के हक अधिकार की बात करने का कोई अधिकार नहीं है।