कानूनी साक्षरता से सशक्त होगा समाज: सुआ में 'निःशुल्क विधिक सहायता शिविर' संपन्न



मेदिनीनगर (पलामू): 
समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भीष्म नारायण सिंह (B.N.S.) लॉ कॉलेज, मेदिनीनगर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (IQAC), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), पलामू और नयी संस्कृति सोसाइटी (NGO) के संयुक्त तत्वावधान में सुआ गांव में एक दिवसीय विशाल विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

 *न्याय की मशाल: प्राचार्य पंकज कुमार का संदेश* 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीएनएस लॉ कॉलेज के प्राचार्य पंकज कुमार ने शिक्षा और कानून के समन्वय पर जोर देते हुए कहा:
"एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना तभी संभव है जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी अपने अधिकारों के प्रति सचेत हो। अक्सर जानकारी के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के लोग कानूनी पेचीदगियों में फंस जाते हैं। हमारा उद्देश्य केवल किताबी शिक्षा देना नहीं, बल्कि कानून को उन लोगों के दरवाजे तक पहुँचाना है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह शिविर अकादमिक ज्ञान और जमीनी हकीकत के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।"

 *निःशुल्क सहायता और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार* 

मुख्य अतिथि संतोष पांडेय (उप मुख्य, एलडीसी, पलामू) ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समाज के शोषित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कैसे निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों को डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं और अंधविश्वास से दूर रहने की कड़ी चेतावनी देते हुए इसे समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताया।

 *भूमि विवादों का कानूनी समाधान* 

वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पांडेय ने ग्रामीण क्षेत्रों के ज्वलंत मुद्दे 'भूमि विवाद' पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पारिवारिक भूमि का मौखिक या पारंपरिक बंटवारा कानूनी रूप से मान्य नहीं है। भविष्य की मुकदमेबाजी से बचने के लिए उन्होंने सभी ग्रामीणों को भूमि का बंटवारा लिखित एवं प्रमाणित रूप से कराने की सलाह दी। वहीं, अधिवक्ता उत्तम कुमार ने ग्रामीणों को उनके मौलिक अधिकारों के बारे में जागरूक किया।
 *आशा की किरण: नयी संस्कृति सोसाइटी* 

नयी संस्कृति सोसाइटी के सचिव अजीत कुमार पाठक ने "लीगल एड" की महत्ता पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यह शिविर केवल एक सहायता केंद्र नहीं, बल्कि न्याय की उम्मीद खो चुके लोगों के लिए आशा की एक नई किरण है। संस्था की ओर से रिसोर्स पर्सन चंदा झा ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 *शिक्षाविदों का सहयोग* 

शिविर को सफल बनाने में शैक्षणिक जगत की सक्रिय भागीदारी रही। सहायक प्रोफेसर शाइस्ता नाज़ (IQAC समन्वयक), चंद्रकला कुमारी, सुप्रिया दुबे और अपर्णा वर्मा ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े कानूनों की सरल जानकारी ग्रामीणों के साथ साझा की।

इस अवसर पर सुआ मुखिया दुलानी देवी, मुखिया पति उपाध्या सिंह, उप प्रमुख सीतल सिंह चेरो और पीएलवी बासंती कुमारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। शिविर का समापन "न्याय सबके लिए" के संकल्प के साथ हुआ।

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